दो राहगीर – The Two Passenger

Stories – The Two Passanger

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एक बार दो राहगीर साथ-साथ कहीं जा रहे थे। रास्ते मे उन्हें सोने का एक हार पड़ा दिखाई दिया। एक राहगीर को दूसरे राहगीर ने उस ओर इशारा किया। तो उस राहगीर ने आगे बढ़कर वह हार उठा लिया और कहा- “मेरा भाग्य जाग उठा, मुझे सोने का हार मिल गया है। अब मैं मौज करूँगा।”

यह सुनकर दूसरे राहगीर ने कहा- “कैसी बातें करते हो भाई ! यह क्यों कहते हो की हार मुझे मिला है यहां क्यों नहीं कहते कि हार हमें मिला है। हम दोनों मित्र एक साथ चल रहे हैं, तब यह हार हम दोनों को मिला और इसमें हम दोनों का बराबर हिस्सा है।

तब पहला राहगीर हंस कर बोला-  “हार तो मैंने उठाया फिर इसमें तुम्हारा हिस्सा कैसे हो गया? साफ बात है- यह हार मेरा है। मैं तुम्हें इसका कोई हिस्सा नहीं दूंगा इस।”

इस पर दूसरा राहगीर कुछ नही बोला, दोनों चुपचाप चलने लगे। इतने में हार का मालिक दो सिपाहियों के साथ दौड़ता-दौड़ता वहाँ आ पहुँचा। कुछ चोर उस सेठ के जेवरात चुरा ले गए थे, जो उसी रास्ते से भागे थे और उस समय रास्ते में वह हार गिर गया था। सेठ ने राहगीर के हाथ में हार देखा तो गरजकर कहा- “मेरा हार कहां ले जाता है? चल मेरे साथ पुलिस-थाने, नही तो मारते-मारते कचुमर निकाल दूंगा।  चोर कहीं का!”

अब तो पहला राहगीर बहुत घबराया और दूसरे राहगीर से बोला – “मित्र, अब तो हम बुरे फँसे। हम न यह हार उठाते, न इस विपत्ति में फंसते।”

 दूसरे राहगीर ने उत्तर दिया – तुम अभी तो कह रहे थे कि हार मुझे मिला और मेरा है, इसलिए मैं तुम्हें इसका कोई हिस्सा नहीं दूंगा। अब पकड़े गए तो कहने लगे कि हम बुरे फंसे। अरे भाई! यह कहो कि मैं बुरा फँसा। बस, जाओ पुलिस थाने में और भोगो सजा।”

 पहला राहगीर अब क्या कहता! वह आंखों में आंसू भरकर दूसरे राहगीर का मुहँ ताकने लगा। उसकी यह दशा देखकर दूसरे राहगीर को दया आ गई और उसने हार के मालिक से कहा – “देखो भाई, इस राहगीर ने तुम्हारा हार चुराया नहीं है, यह तो रास्ते में पड़ा मिला। तो तुम इस पर चोरी का आरोप नहीं लगा सकते। मेरा कहना मानो, अपना हार ले लो और इसे छुड़वा दो।”

बात सेठ को समझ में आ गई। उसने ऐसा ही किया। इसके बाद दूसरे राहगीर ने अपने साथी से कहा –  “मित्र के साथ छल कपट करने का फल बुरा निकलता है। जो आदमी अपने मित्र को सुख में हिस्सा नहीं दे सकता वह दुख में कैसे दे सकता है।

शिक्षा – मित्र के साथ छल कपट करने का फल बुरा मिलता है।

In English

Stories – The Two Passenger

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Once two passenger were going somewhere along the way. On the way they had a necklace of gold. One passenger pointing to another passenger. Then the passenger went ahead and lifted the necklace and said, “My fate wakes up, I have got the gold necklace. Now I will be rich.”

The other passenger  said, “What are you talking to brother, why do you say that I have got a necklace why do not said that we have got a necklace here, we both are walking together, then we got this necklace together There is an equal part of both of us in this.

Then the first passenger laughed and said, “I take the necklace then, how i give you share in it? It is a clear thing – this necklace is mine, I will not give you any part of it.”

The second passerby did not say anything; both of them started walking silently. In such a situation, the owner of the necklace runs along with two soldiers. Some thieves had stolen his jewelry, which ran through the same route and at that time the neck fell. When the owner saw the necklace in the hand of the passenger, he thundered and said, “Where does my necklace take? Come with me, police-station, otherwise I will kill you.”

Now the first passenger got very nervous and said to the other passerby: “Friend, now we are trapped in bad. We did not take this necklace or be caught in this disaster.”

 The other passenger replied – You were just saying that the necklace has got me and mine, so I will not give you any part of it. Now caught, they started saying that we were badly trapped. Dear brother! Say that I have trapped in bad. Just go, and be punished in police station. “

 What the first passenger now says! He started filling tears in his eyes and started looking for another passenger. Seeing his condition, the other passenger got pity and said to the owner of the necklace – “Look brother, this passenger has not stolen your necklace; it was found lying on the road, so you can not accuse him of stealing. Say, take your necklace and leave the passenger. “

The owner of necklace understood the point. He did exactly the same. After this, the other passenger said to his companion – “It is a bad thing to cheat with a friend.” How can a person who cannot share his happiness with friends and share sadness with friends?

Moral of Stories – The reward of betraying a friend is bad.

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