सच्ची दोस्ती । Stories – The True Friendship

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यश नाम का एक राजा था। उसके महल के बाग में एक बहुत पुराना आम का पेड़ था। उस पेड़ पर बहुत मीठे आम लगते थे। राज्य में उससे मीठा अन्य कोई आम का पेड़ नहीं था। राजा को वह पेड़ बहुत पसंद था, किंतु पुराना पेड़ होने के कारण अब उसकी कई शखाँए सूख गई थी तथा फल भी बहत कम लगते थे।
 यह देख राजा ने उस पेड़ की जगह एक दूसरा मीठा आम का पेड़ लगवाने का विचार किया। उसने मंत्री से उस पेड़ को कटवाकर एक दूसरा मीठा आम का पेड़ लगावानें को कहा। मंत्री ने राजा की आज्ञा का पालन करते हुए शिवा नाम के एक लकड़हारे को पेड़ काटने का काम सौंप दिया।
 शिवा अपने साथ तेज धार वाली कुल्हाड़ी लेकर महल के बाग में पेड़ काटने जा पहुंचा। उसने जैसे ही पेड़ पर प्रहार करना चाहा, अचानक उसकी दृष्टि पेड़ के एक घोसलें पर पड़ी। उस घोसलें में एक तोता अपने दो बच्चों के साथ बैठा था।

 तोते को बच्चे के साथ घोसलें में बैठा देख कर लकड़हारा तोता से बोला- “हे तोते ! तू फौरन अपने बच्चों के साथ इस पेड़ से किसी अन्य पेड़ पर चला जा, क्योंकि मैं राजा की आज्ञा से इस पेड़ को काटने जा रहा हूं।”
लकड़हारे की बात सुनकर तोता बोला- “देखो भाई, मैं इस पेड़ से किसी अन्य पेड़ पर नहीं जाऊंगा। तुम्हें यह पेड़ काटना है तो काटो। मैं अपने बच्चों के साथ यही रहूंगा।”
 लकड़हारा तोते नासमझ समझकर समझाते हुए बोला- “देखो, मैं तुमसे फिर कह रहा हूं तुम इस पेड़ से किसी अन्य पेड़ पर चले जाओ। यह पेड़ अभी कुछ ही देर में कटकर जमीन पर गिर पड़ेगा। जिससे तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को गहरी चोट लग सकती है, यहां तक कि तुम सब की मृत्यु हो जाने की संभावना भी है। इसीलिए मेरी बात मानो और अपने बच्चों के साथ यहां से सुरक्षित दूसरी जगह चले जाओ।”
 तोता लकड़हारे के समझाने के बाद भी पेड़ से नहीं गया। वह आराम से अपने बच्चों के साथ उसी पेड़ पर बैठा रहा। यह देख लकड़हारे ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन तोता नही माना।
शिवा दयालु व्यक्ति था। वह तोते व उसके मासूम बच्चों की मृत्यु नहीं देखना चाहता था। इसलिए वो वापस राजा के पास गया। उसने राजा को सारी बात बता दी। राजा को भी पशु-पक्षियों से बहुत प्यार था। इसलिए राजा लकड़हारे के साथ तोते को समझानें बाग में आया।
 उसने देखा, तोता अपने दोनों बच्चों के साथ घोसलें में बैठा मिल-बांटकर एक फल खा रहा है। राजा यह देख कर बहुत खुश हुआ। वह तोते से बोला- “हे प्यारे तोते ! मैंने इस आम के पेड़ की जगह दूसरा आम का पेड़ लगाने की बात सोची है। अतः मैं इस पेड़ को कटवाने जा रहा हूं। इसलिए तुम अपने बच्चों के साथ बाग के किसी अन्य पेड़ पर सुरक्षित चले जाओ।”

 तोता राजा की बात सुनकर बोला- “हे राजन ! मैं इस पेड़ से किसी अन्य पेड़ पर नहीं जाऊंगा।
 “भला क्यों? क्या तुम्हें अपनी व अपने बच्चों की जान प्यारी नहीं है? राजा तोते से प्रश्न करते हुए बोला।
 तोते ने राजा के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा- “राजन हर जीव को अपनी जान प्यारी होती है, लेकिन जान से बढ़कर जीवन का एक फर्ज भी होता है। इसीलिए मैं अपनी व अपने बच्चों की जान की परवाह न करके अपना फर्ज अदा करने के लिए इस पेड़ से कसी अन्य पेड़ पर नहीं जा रहा हूं।
“फर्ज कैसा फर्ज प्यारे तोते ! जरा अपनी बात को स्पष्ट करके हमें बतलाओ?” राजा ने तोते से कहा।
 तोता राजा को अपनी बात समझाते हुए बोला- “राजन दोस्ती का फर्ज। मैं इस पेड़ पर रह कर अपनी दोस्ती का फर्ज अदा कर रहा हूं। यह बूढ़ा वृक्ष हमारा सच्चा मित्र है। इससे हमारा नाता बहुत पुराना है। आपको पता नहीं इस वृक्ष के इसी घोसलें में मेरा जन्म हुआ था। इसी की छाया रह कर, इसका फल-फूल खाकर मैं बड़ा हुआ हूं। इसने ना जाने कितनी बार आंधी, तूफान और बारिश सें मेरी रक्षा की है, और मेरे सुख-दुख में मेरा साथ दिया है तथा आज भी हमें और हमारे बच्चों को इसी घोसलें में पाल-पोस रहा है। अतः आज जब यह बूढ़ा हो गया हैऔर इस समय संकट के घेरे में खड़ा है, तो मैं इसको ऐसे समय में छोड़ कर भला कैसे जा सकता हूं। आपको यदि इस वृक्ष को काटना है तो काटिए मैं अपने जीते जी इस वृक्ष को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा चाहे मेरी व मेरे बच्चों की जान ही क्यों न चली जाए।

राजा तोते की बातें सुनकर व उसकी बूढें वृक्ष के प्रति सच्ची मित्रता को देखकर आश्चर्यचकित रह गया और तोते को मित्रता का फर्ज अदा करते हुए देख कर बहुत खुश हुआ। उसने तोते से कहा- “हे तोते ! मैं तेरी मित्रता देख कर बड़ा खुश हुआ। मैं वादा करता हूं कि इस वृक्ष को आज के बाद कोई नुकसान नहीं होगा।” और फिर राजा ने लकड़हारे को वापस भेज दिया।

In English

There was a king named Yash. There was a very old mango tree in his garden. The mango on that tree was very sweet. There was no other mango tree have sweet mango like that tree in the state. The king liked that tree, but because of it became old trees, now many of his herds had dried up and the fruits also seemed to be very low.

 Seeing this, the king thought of putting another sweet mango tree in place of that tree. He told the minister to cut the tree and put another sweet mango tree. Following the order of the king, the minister handed over the task of cutting trees to a logger named Shiva.
 Shiva, along with a sharp-edged axe, went to cut trees in the palace garden. As soon as he tried to hit the tree, suddenly his eyes fell on a nest of the tree. In that nest a parrot was sitting with his two babies. Seeing the parrot sitting in the nest with the child, he said to the parrot, “Parrot! You should go with your baby from this tree to another tree, because I am going to cut this tree with the order of the king.”
The parrot said, “Look, brother, I will not go to any other tree from this tree.
 Explaining the logger parrots as a fool, he said, “Look, I am telling you again, go from this tree to any other tree, this tree will be cut in a few minutes and fall on the ground, causing you and your children to suffer deeply. Even you all are likely to die. That is why obey me and go away from here with your children to another place. “
 Parrot did not even go through the tree after explaining the logger. She was sitting comfortably with her children on the same tree. Seeing this, the woodcutter tried very hard to explain it, but the parrot did not believe it.
Shiva was kind person. He did not want to see the death of parrots and his innocent children. So he went back to the king. He told the king everything. The king too loved the animals and birds. Therefore, the king came to the garden with a logger and understand the parrot.
 He saw that the parrot is eating a fruit by sharing and distributing sweets with his two children. The King was very pleased to see this He said to the parrot – “O my beloved parrot! I have thought of putting another mango tree in place of this mango tree, so I am going to cut this tree, so you are safe with your children on any other tree in the garden. Please  go.”
 After listening to the parrot king, he said, “O King, I will not go to any other tree with this tree.
 “But Why? Do not you love yourself and your children?”
 The parrot answering the King’s question said, “O King, Is very dear to every creature, but there is a charge of life even more than life. That is why I have to pay my duty without worrying about the lives of my children. I am not going to any other tree from this tree.
“What kind of dear parrots! Just tell us by clarifying your point?” The king said to the parrot. Explaining his parable to the parrot, he said, “Is the duty of friendship, I am paying this duty for my friendship by living on this tree, this old tree is our true friend, this is our old age, you do not know this tree. I was born in the same nest. I have grown up by eating the fruit of it and this tree work as shield for us in so many storms and rain, and in my pleasure and misery, And today even today we and our children have been embracing these nest. So today when it has grown old and is standing in the midst of trouble at this time, how can I go and leave it at such a time? If you have to cut this tree then cut it, I will not leave this tree except for this tree, why should not I die and my children too?
The king was amazed to hear the words of the Parrot and seeing his true friendliness towards the old tree, and was very happy to see the parrot being paid for the sake of friendship. He said to the parrot- “Hey Parrot, I was very happy to see your friendship. I promise that there will be no harm after this tree today.” And then the king sent the logger back.
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